प्रवासी श्रमिकों को देख पसीजा पुलिस का मन, चप्पल-गमछा देकर की मदद

रायपुर। कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए लगाया गया लॉकडाउन खासकर प्रवासी श्रमिकों के लिए कहर बन गया है। गरीबी, बेबसी और गृहग्राम पहुंचने के लिए मजदूरों ने हर संभव प्रयास किया है। लॉक डाउन निरंतर बढ़ने और कोरोना संक्रमण से भयभीत प्रवासी श्रमिक जैसे-तैसे करके अपने परिजनों के बीच पहुंचना चाहते हैं। उद्योग धंधे बंद होने की वजह से दो वक्त के खाने का भी इंतजाम नहीं हो रहा। रेल, बस सहित यातायात के सभी साधन बंद हो जाने से इनके समक्ष उत्पन्न भुखमरी की स्थिति ने विकराल रूप ले लिया है। इससे निजात पाने के लिए श्रमिक पैदल ही सैकड़ों और हजारों किलोमीटर का सफर तय कर रहे हैं।इस भीषण गर्मी में अपने-अपने गृह राज्य और जिले की ओर लौट रहे श्रमिकों को अनेक यातनाओं का सामना करना पड़ रहा है। मासूम बच्चे और महिलाओं को नंगे पांव धूप में चलते देखकर दुर्ग पुलिस का दिल पसीजा और अपने स्तर पर व्यवस्था करके चप्पल और गमछा श्रमिकों को देकर पीड़ित मानवता की सेवा के लिए अनुकरणीय कदम उठाया।

शुक्रवार को अंजोरा बायपास के पास मजदूरों को दोपहर में धूप से बचाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव के द्वारा सराफा कारोबारियों के सहयोग से मजदूरों को गमछा और चप्पल प्रदान किया गया। मजदूरों की दुर्दशा देखकर पुलिस के अधिकारी-जवानों का मन दुखी हुआ। चिलचिलाती धूप में पैदल, नंगे पैर सैकड़ों किलोमीटर का सफर छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ गुजरते हुए देखकर दुर्ग पुलिस ने नेक पहल की।

श्रमिकों को चप्पल और गमछा भेंटकर गंतव्य के लिए रवाना किया। दुर्ग पुलिस के जवानों ने जब देखा कि चिलचिलाती धूप में मासूम बच्चे भी अपने माता-पिता के साथ जा रहे हैं। उन्होंने मजदूरों की यात्रा को सुगम बनाने के लिए गमछा और चप्पल वितरित किया। साथ ही मालवाहक वाहनों में फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने गंतव्य तक जाने की व्यवस्था की।

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