जानिए कैसे तंत्र से सवार सकते है अपना जीवन सवाल आपके जवाब हमारे,,

सप्ताह का ज्ञान
गाली गलौज का प्रयोग मान-सम्मान की हानि करके भयंकर आर्थिक कष्ट की पटकथा लिखता है। आलोचना और निंदा आपके नवीन नकारात्मक कर्मों का सृजन करते हैं, जिससे अन्तत: प्रचण्ड कष्टों का निर्माण होता है, ऐसा आध्यात्मिक मान्यताएं कहती हैं।असत्य संभाषण भयंकर आर्थिक कष्टों का सूत्रपात करते हैं, ऐसा प्राचीन ग्रंथ कहते हैं।

टिप्स ऑफ द वीक
जलीय जंतुओं को गुड़ का भोजन मंगल दोष को कम करने में सहायक होता है, ऐसा मान्यताएं कहती हैं।

जन्म का महीना और आपका भविष्य
जून माह में जन्मे लोग विशेष गुणों से सराबोर होते हैं। ये लोग बेहद समझदार, ईमानदार और नेतृत्व की क्षमता से लबरेज होते हैं। लोग इनसे सहज ही आकर्षित हो जाते हैं। इनमें कोई न कोई छुपा हुनर अवश्य होता है। अगर ये अपनी सुप्त प्रतिभा को जान और पहचान कर उसे निखार लें, तो शीर्ष पर पहुंच सकते हैं। इनके स्वभाव में जुनून, जिद और उग्रता का बड़ा गहरा समावेश होता है। ये अनावश्यक बातों पर पहले उलझ जाते हैं और बाद में उसका अफसोस करते हैं। चिकित्सा, पेंटिंग, साहित्य, अध्यापन और राजनीति में ये बेहद सफल होते हैं। ये विपरीत लिंगियों को पहचानने में चूक कर बैठते हैं। ये अक्सर उतावलेपन में बिना तह में जाए गलत राय कायम कर बैठते हैं। इन्हें अक्सर घुटनों में और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये अपने प्रेम का इजहार आसानी से नहीं कर पाते हैं।

प्रश्न: स्वघर का मंगल क्या होता है? ये शुभ है या अशुभ? -मुकेश कुमार
उत्तर: सदगुरुश्री कहते हैं कि जन्म कुंडली में यदि मंगल मेष या वृश्चिक राशि में हो यानी अगर मंगल के 1 या 8 अंक लिखा हो, तो यह स्वग्रही कहलाता है। ऐसे लोग साहसी, दयालु, दबंग, मित्रों के परम मित्र और शत्रुओं के महाशत्रु होते हैं। स्वघर का मंगल यदि लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, और द्वादश भाव में हो, तो मांगलिक होते हुए भी मंगल की तीव्रता में बेहद कमी हो जाती है। यदि स्वघर का मंगल लग्न या पराक्रम भाव में हो, तो ऐसे व्यक्ति अपनी निर्भिकता, साहस और हिम्मत के लिए बहुत दिनों तक याद किए जाते हैं। और यदि स्वग्रही मंगल पराक्रम भाव में हो, तो व्यक्ति सफल प्रशासक बनकर उच्च पद पर आसीन होता है। अगर स्वग्रही मंगल कर्म या लाभ भाव में हो, तो कुलदीपक? दीपिका योग बनाकर कुल कुटुंब में सर्वश्रेष्ठ स्थिति प्रदान करता है।

प्रश्न: क्या पापी ग्रह की महादशा बर्बाद कर देती है? -आशुतोष वर्मा
उत्तर: सदगुरुश्री कहते हैं कि सार्वभौमिक रूप से किसी ग्रह की महादशा शुभ या अशुभ फल देगी, यह सही नहीं है। ग्रहों का या उनकी दशाओं का भला या बुरा असर उसकी स्थिति और उस पर पड़ने वाली दृष्टि पर निर्भर करता है। शुभ स्थिति होने पर कई बार यही पापी ग्रह अपनी दशा में भौतिक दृष्टि से ज्यादा सुख प्रदान करने की क्षमता रखते हैं। अशुभ स्थिति में शुभ ग्रह भी नकारात्मक असर से जीवन का बंटाधार कर सकते हैं।

प्रश्न: क्या तंत्र क्रियाओं से जीवन संवर सकता है? -रमेश कुमार सेठ
उत्तर: सदगुरुश्री कहते हैं कि हमारे सुख-दुख, शान्ति और आनंद हमारे ही ज्ञात-अज्ञात कर्मों की देन है। कर्म पर नियंत्रण से अवश्य ही जीवन को बदला जा सकता है। रही बात तान्त्रिक क्रियाओं की, तो तंत्र जहां तकनीकी विज्ञान है, वहीं साधना नि:स्वार्थ कर्म और श्रम का दूसरा नाम है। तंत्र की साधना के लिए जहां उसकी तकनीकी का पूर्ण ज्ञान अनिवार्य है, वहीं किसी विशेषज्ञ का मार्गदर्शन भी आवश्यक है। आज तंत्र के अधिकतर शोधकार्य लुप्त हो चुके हैं। अत: मैं आपको अपनी योग्यता बढ़ाने और सतत कर्मशील रहने की सलाह देता हूं।

प्रश्न: सिंह राशि के लोग कैसे होते हैं? -शरद अग्रवाल
उत्तर: सदगुरुश्री कहते हैं कि सिंह राशि के लोग महत्वाकांक्षी, स्वाभिमानी, कुलीन, अधीर, आत्ममुग्ध होते हैं। इनका दृष्टिकोण आशावादी होता है। ये लोग साफ बोलने वाले होते हैं। कम आय में भी ये ठाटबाट से रह लेते हैं। ये लोग दयालु, क्षमा करने वाले और बेहद वफादार होते हैं। इनके भीतर आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा होता है। क्रोध में ये लोग हिंसक हो जाते हैं। झूठी प्रशंसा इन्हें नापसंद होती है। विपरीत लिंगियों के प्रति आकर्षण और कामेक्षा सामान्य से अधिक होती है। जीवन में एक से अधिक संपत्ति अर्जित करते हैं। घूमने व खाने-पीने के शौकीन होते हैं

नोट: अगर, आप भी सद्गुरु स्वामी आनंद जी से अपने सवालों के जवाब जानना चाहते हैं या किसी समस्या का समाधान चाहते हैं तो अपनी जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान के साथ अपना सवाल

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