दिल की बीमारियों के लिए योग मंत्र मेडिटेशन के साथ मिलेगा लाभ..

आजकल की तनावयुक्त व्यस्त जीवनशैली लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है. यही वजह है कि जहां कुछ सालों पहले तक हृदय संबंधी समस्याएं उम्रदराज़ लोगों को हुआ करती थीं, वहीं अब ये युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही हैं. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि दुनियाभर में लगभग 1.5 करोड़ लोगों की मौत हृदय रोग की वजह से होती है. इसमें 85 फीसदी मौतें सिर्फ हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह से होती हैं.

भारत में भी दिल की बीमारियों के कारण होने वाली मौतों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है. भारत की 1.30 अरब की आबादी में से 4.5 करोड़ लोग दिल की बीमारी से पीडि़त हैं. इस लिहाज से भारत में हृदय रोगियों की संख्या दुनिया में सर्वाधिक है. अमेरिका के एक रिसर्च जरनल में छपे लेख के मुताबिक़, 2015 तक भारत में 6.2 करोड़ लोगों को दिल से जुड़ी बीमारी हुई. इसमें से तकरीबन 2.3 करोड़ लोगों की उम्र 40 साल से कम है. यानी 40 फ़ीसदी हार्ट के मरीज़ों की उम्र 40 साल से कम है. भारत के लिए ये आंकड़े अपने आप में चौंकाने वाले हैं. healthdata.org के मुताबिक प्रीमैच्योर डेथ यानी अकाल मृत्यु के कारणों में 2005 में दिल की बीमारी का स्थान तीसरा था, लेकिन 2016 में दिल की बीमारी, अकाल मृत्यु का पहला कारण बन गया है. मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान एवं आनुवंशिक कारणों से दिल की बीमारियों की संभावना बढ़ रही है. लोगों को हृदय से जुड़ी कई बीमारियां होती हैं और इसके कई कारण हैं. भारत में पिछले 26 साल में दिल की बीमारी से मरने वालों की संख्या में 34 फीसदी बढ़त दर्ज हुई है. तनाव, अस्वस्थ जीवनशैली, फास्ट फूड का बढ़ता सेवन, खाने में नमक की अधिक मात्रा, एक्सरसाइज़ की कमी, धूम्रपान व शराब का सेवन इत्यादि इसके प्रमुख कारण हैं.

दिल की बीमारियों से बचने के लिए खानपान व जीवनशैली में सुधार के साथ-साथ मंत्र, मुद्रा व मेडिटेशन की शरण में जाकर आपको बेहद लाभकारी परिणाम मिल सकते हैं.

योग विज्ञान के अनुसार, हमारे हृदय के पास स्थित अनाहद चक्र का अंसतुलित होना हृदय रोगों का प्रमुख कारण है. आजकल लोग तनाव, एंजायटी, स्ट्रेस और फियर में जीवन व्यतीत करते है या उनकी जीवनशैली बदल गई है. जिसके कारण हृदय रोग होते हैं. इसके दूर करने के लिए मुद्रा विज्ञान में बहुत अच्छे उपाय बताए गए हैं.

हृदय रोग दूर करने में संजीवनी या हृदय मुद्रा बहुत कारगर है. इस मुद्रा को लगाने के लिए तर्जनी से अंगूठे के बेस पर स्पर्श करें. मध्यमा और अनामिका से अंगूठे के पोर को टच करें. तर्जनी वायु तत्व का प्रतीक है. हम उसे अग्नि तत्व यानी अंगूठे के पास लाकर उसे संतुलित करने की कोशिश करते हैं. अग्नि के पास स्पेस यानी मध्यमा को ले आते हैं, क्योंकि हृदय रोग इसलिए पैदा होता है, क्योंकि वहां यानी हृदय में स्पेस कम होता जाता है. उसके साथ पृथ्वी तत्व यानी अनामिका लाते हैं, क्योंकि हमें हृदय की मांसपेशियां और नाड़ियों को भी मजबूत करना है. उन्हें एक डायरेक्शन में लाना है.

हथेलियों में यह मुद्रा लगाकर हाथों को घुटने पर रखें. आंखें बंद करें और हृदय पर ध्यान केंद्रित करें. श्वास धीमे-धीमे लें. इसके साथ ॐ नमः शिवाय का जाप करें. हृदय में मंत्र का जाप करें. श्वास लेते हुए इस मंत्र का जाप करें और फिर श्वास रोकें. श्वास छोड़ने से पहले फिर से जाप करें और फिर श्वास छोड़ें. श्वास छोड़ने के बाद एक बार फिर मंत्र का जाप करें.शिव कोई व्यक्ति या आकृति नहीं है. यह चेतन तत्व है. इससे मिलने से ब्लॉकेज व असंतुलन में संतुलन आता है. नमः का अर्थ है झुक जाना, समर्पित या अपर्ति हो जाना. हम इसके माध्यम से कहते हैं कि जो कुछ है, वो तेरा है. मेरा कुछ नहीं है. हुक्म भी उसका और आदेश भी उसका. शिवाय का अर्थ है शव के पार. शव तो मर गया, लेकिन उसके पार कौन है. कहते हैं कि जब शव मर जाता है तो बीच में कुछ निकलता है. वो परम तत्व यानी शिव तत्व है, इसलिए उसके साथ जो सदा था, सदा है और सदा रहेगा, वो शिवाय है. उसको हम प्रणाम करते हैं. इस मंत्र-मुद्रा का प्रवाह हृदय की तरफ बढ़ता है. इससे हृदय में शांति आती है.मंत्र और मुद्रा संपन्न होते ही ध्यान में उतर जाएं. आप जितना गहरा ध्यान करेंगे, आपका रक्त उतना ही शुद्ध होगा, बैड कोलेस्ट्रॉल घटने लगेगा और हृदय संबंधी समस्याएं ख़त्म होने लगेंगी और दिल को नई शक्ति मिलेगी.इस तरह ध्यान, मुद्रा और मंत्र का संगम अपने हृदय में नई शक्ति फूंक देगा. ध्यान लगाने के लिए दोनों हाथों को संजीवनी मुद्रा में रखकर लेट जाएं. आंखें बंद कर लें. शरीर को मुर्दा की तरह ढीला छोड़ दें. धीरे-धीरे ॐ नमः शिवाय का जाप करें. श्‍वास के साथ मंत्र चलते रहना चाहिए. जैसे-जैसे शरीर ढीला होता जाएगा, इस मंत्र की तरंगें पहुंचना शुरू हो जाएंगी. जैसे-जैसे इस मंत्र की तरंगें आपके शरीर में पहुंचें, इसी मंत्र को ध्यान बना लें. इसी मंत्र का ध्यान लगा लें. मंत्र ही ध्यान हो जाएगा, ध्यान ही मंत्र हो जाएगा. आपके और मंत्र में कोई अंतर नहीं होना चाहिए. जैसे-जैसे आप ध्यान में उतरते जाएंगे, आपका रक्त व हृदय शुद्ध होते जाएगा.सिर्फ हृदय संबंधी रोग ही नहीं, ध्यान और मंत्र-मुद्रा की मदद से आप जोड़ों में दर्द, ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, एंज़ायटी जैसी 1-2 नहीं, बल्कि 48 बीमारियों से निजात पा सकते हैं. इसके लिए डाउनलोड करें वैदिक हीलिंग मंत्र ऐप. जिसमें 48 बीमारियों से संबंधित 48 मंत्रों व मुद्राओं के साथ-साथ 48 रोगों के लिए गाइडेड मेडिटेशन टेक्नीक यानी ध्यान के तरीक़ों की भी जानकारी दी गई है. इस तरह आप मंत्र, मुद्रा व ध्यान विज्ञान की इस प्राचीन विद्या का लाभ उठाकर स्वस्थ-निरोगी जीवन पा सकते हैं.

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