पानदुकान चलाकर बेटे को पढ़ाने वाले पिता का पुत्र टिकेश ने किया छतीसगढ़ 12वीं परीक्षा में टॉप..

विवेक माणिक, मुंगेली। किसी विद्‌वान ने सच ही कहा है कि परिश्रम सफलता की कुंजी है..
आज यदि हम देश-विदेश के महान अथवा सुविख्यात पुरुषों अथवा स्त्रियों की जीवन-शैली का आकलन करें तो हम यही पाएँगे कि जीवन में इस ऊँचाई या प्रसिद्‌धि के पीछे उनके द्‌वारा किए गए सतत अभ्यास व परिश्रम का महत्वपूर्ण योगदान है।


परिश्रमी व्यक्ति ही किसी समाज में अपना विशिष्ट स्थान बना पाते हैं ।

अपने परिश्रम के माध्यम से ही कोई व्यक्ति भीड़ से उठकर एक महान कलाकार, शिल्पी, इंजीनियर, डॉक्टर अथवा एक महान वैज्ञानिक बनता है ।

परिश्रम पर पूर्ण आस्था रखने वाले व्यक्ति ही प्रतिस्पर्धाओं में विजयश्री प्राप्त करते हैं । किसी देश में नागरिकों की कर्म साधना और कठिन परिश्रम ही उस देश व राष्ट्र को विश्व के मानचित्र पर प्रतिष्ठित करता है ।


अत: उन्नति विकास एवं समृद्धि के लिए यह आवश्यक है कि सभी मनुष्य परिश्रमी बनें । परिश्रम वह कुंजी है जो साधारण से साधारण मनुब्ध को भी विशिष्ट बना देती है । परिश्रमी लोग सदैव प्रशसा व सम्मान पाते हैं । वास्तविक रूप में उन्नति व विकास के मार्ग पर वही व्यक्ति अग्रसर रहते हैं जो परिश्रम से नहीं भागते ।

भाग्य का सहारा वही लोग लेते हैं जो कर्महीन हैं ।

अपने बुलंद हौसले और मेहनत से मुंगेली के छोटे से गांव गीधा में रहने वाले टिकेश वैष्णव ने 12वी में टॉप कर के 97.80 प्रतिशत अंक हासिल कर अपने माता पिता के साथ मुंगेली जिले को प्रदेश स्तर पर नाम रोशन किया है।

टिकेश के पिताजी एक पान ठेला चलाकर घर चलाते हैं। टिकेश का कहना है कि अपने पिता को पान दुकान में बैठकर मेहनत करते हुए देखने से उनके मन में बहुत तकलीफ होती है और इस कारण उनके मेहनत से प्रेरित होकर वह पढ़ाई लिखाई में भरपूर मेहनत करते हैं।

वही उनकी मेहनत को देखकर बेटे ने पूरा ध्यान पढ़ाई में दिया और पूरे छत्तीसगढ़ में टॉप किया। टॉप करने के बाद टिकेश को बधाई देने का सिलसिला जारी हो गया हैं।किसी विद्‌वान ने सच ही कहा है कि परिश्रम सफलता की कुंजी है..
आज यदि हम देश-विदेश के महान अथवा सुविख्यात पुरुषों अथवा स्त्रियों की जीवन-शैली का आकलन करें तो हम यही पाएँगे कि जीवन में इस ऊँचाई या प्रसिद्‌धि के पीछे उनके द्‌वारा किए गए सतत अभ्यास व परिश्रम का महत्वपूर्ण योगदान है।
परिश्रमी व्यक्ति ही किसी समाज में अपना विशिष्ट स्थान बना पाते हैं ।
अपने परिश्रम के माध्यम से ही कोई व्यक्ति भीड़ से उठकर एक महान कलाकार, शिल्पी, इंजीनियर, डॉक्टर अथवा एक महान वैज्ञानिक बनता है ।
परिश्रम पर पूर्ण आस्था रखने वाले व्यक्ति ही प्रतिस्पर्धाओं में विजयश्री प्राप्त करते हैं । किसी देश में नागरिकों की कर्म साधना और कठिन परिश्रम ही उस देश व राष्ट्र को विश्व के मानचित्र पर प्रतिष्ठित करता है ।
अत: उन्नति विकास एवं समृद्धि के लिए यह आवश्यक है कि सभी मनुष्य परिश्रमी बनें । परिश्रम वह कुंजी है जो साधारण से साधारण मनुब्ध को भी विशिष्ट बना देती है । परिश्रमी लोग सदैव प्रशसा व सम्मान पाते हैं । वास्तविक रूप में उन्नति व विकास के मार्ग पर वही व्यक्ति अग्रसर रहते हैं जो परिश्रम से नहीं भागते ।
भाग्य का सहारा वही लोग लेते हैं जो कर्महीन हैं ।
अपने बुलंद हौसले और मेहनत से मुंगेली के छोटे से गांव गीधा में रहने वाले टिकेश वैष्णव ने 12वी में टॉप कर के 97.80 प्रतिशत अंक हासिल कर अपने माता पिता के साथ मुंगेली जिले को प्रदेश स्तर पर नाम रोशन किया है।
टिकेश के पिताजी एक पान ठेला चलाकर घर चलाते हैं। टिकेश का कहना है कि अपने पिता को पान दुकान में बैठकर मेहनत करते हुए देखने से उनके मन में बहुत तकलीफ होती है और इस कारण उनके मेहनत से प्रेरित होकर वह पढ़ाई लिखाई में भरपूर मेहनत करते हैं।
वही उनकी मेहनत को देखकर बेटे ने पूरा ध्यान पढ़ाई में दिया और पूरे छत्तीसगढ़ में टॉप किया। टॉप करने के बाद टिकेश को बधाई देने का सिलसिला जारी हो गया हैं।

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