MADE IN INDIA कार्यक्रम की अवधारणा को बल देने CAIT ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री गोयल को लिखा पत्र

रायपुर। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष अमर परवानी, कार्यकारी अध्यक्ष मंगेलाल मालू, विक्रम सिंहदेव, महामंत्री जितेंद्र दोषी, कार्यकारी महामंत्री परमानंद जैन, कोषाध्यक्ष अजय अग्रवाल, प्रवक्ता राजकुमार राठी ने बताया कि देश में चीनी सामानों के बहिष्कार के लिए अपने राष्ट्रीय अभियान में एक बड़ा महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को आज भेजे एक पत्र में मांग की है कि भारत में ई कॉमर्स अथवा बाजारों या अन्य किसी भी जरिये से बेचे जाने वाली प्रत्येक वस्तुओं पर किस देश में वो सामान निर्मित है तथा उक्त वस्तु में मूल्यवर्धन की सामग्री का उल्लेख अनिवार्य होना चाहिए।
उल्लेखनीय है की कैट द्वारा पूर्व में की गई एक मांग को स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार ने सरकारी ई पोर्टल जैम पर बेचे जाने वाले सभी उत्पादों पर उपरोक्त दोनों विवरणों का उल्लेख करना अनिवार्य कर दिया है। कैट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर पारवानी ने कहा कि चीन और अन्य देशों से आयात किये गए विभिन्न उत्पादों पर किन्ही तत्वों द्वारा मेड इन इंडिया का लेबल चिपकाकर भारत में बेचे जाने की सूचनाएं कैट को प्राप्त हुई हैं और इसी के मद्देनजर कैट ने वाणिज्य मंत्री गोयल से यह मांग की है की भारत में ई-कॉमर्स, ऑफलाइन बाजार , बड़े कॉर्पोरेट शोरूम, डायरेक्ट सेलिंग या किसी भी अन्य तरीके से कोई भी सामान बेचे जाने पर उस सामान के निर्मित देश और उस सामान को बनाने में लगे एक अथवा एक से अन्य देशों के सामान का पूर्व विवरण लिखा जाना अनिवार्य करना बेहद जरूरी है। कैट ने यह भी मांग की है कि उपरोक्त विवरण न देने वाले उत्पादों को देश में नहीं बेचा जाना चाहिए और इस प्रावधान के उल्लंघन की स्थिति में निर्माता, आयातक या मार्केटिंग एजेंसी जिसका नाम उक्त उत्पाद पर लिख हो को जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
श्री पारवानी ने कहा कि सामानों के निर्माण में उत्पादों की संरचना के बारे में विवरण होगा कि क्या उत्पाद 100 प्रतिशत मेड इन इंडिया है या आयातित या भारतीय सामाग्री के उपयोग से बना है अथवा क्या पूर्ण रूप से आयातित उत्पाद है की सही जानकारी उपभोक्ताओं को देगा जिससे सामान खरीदते समय उपभोक्ता पूर्ण रूप से निश्चिन्त होंगे की वो कौन से देश का बना सामान खरीद रहे हैं।
श्री पारवानी ने कहा की देश में बेचे जाने वाले प्रत्येक सामान पर कंट्री ऑफ ओरिजिन और वैल्यू एडिशन के उल्लेख का अनिवार्य प्रावधान ग्राहकों को यह समझने में मदद करेगा की वो जो सामान खरीद रहे हैं है वो भारत अथवा किस देश में बना है जिससे ग्राहक के सभी भ्रम दूर होंगे । इस तरह के प्रावधान से केन्द्र सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम की अवधारणा को भी बल देगा तथा कुछ निहित स्वार्थों वाले लोग जो चीन के बने सामानों को अनैतिक रूप से मेड इन इंडिया का बताकर बेच रहे हैं जैसी कोशिशों को ध्वस्त करेगा।
श्री पारवानी ने कहा कि जब से केंद्र सरकार ने अपनी घोषणा की तारीख से ही जैम पोर्टल पर बेचे जाने वाले उत्पादों पर उपरोक्त दोनों प्रावधानों का उल्लेख करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है तब अन्य ई-कॉमर्स कंपनियों को इस प्रावधान को तुरंत अमल में लाने में देरी का कोई कारण नहीं होना चाहिए और उन्हें होना तत्काल प्रभाव से अपने पोर्टल पर लागू करना चाहिए । कैट ने कहा है की इस प्रावधान के बहाने ई-कॉमर्स कंपनियों को इस निर्णय को दरकिनार करने में देरी करने का कोई बहाना नहीं ढूंढ़ना चाहिए ।

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