e-SIM फ्रॉड में लुट गए 21 लाख रुपये, आप हो सकते हैं अगला शिकार

ऑनलाइन फ्रॉड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और स्कैमर्स इसके लिए नए-नए तरीके आजमाते रहते हैं। अब सामने आया है कि टेलिकॉम कंपनियों की नई e-SIM सर्विस का फायदा फ्रॉड करने वाले उठा रहे हैं। हैदराबाद में चार लोग इस फ्रॉड का शिकार बनकर 21 लाख रुपये तक गंवा चुके हैं। इससे बचने के लिए आपको ये बातें पता होनी चाहिए।

नई दिल्ली
भारत में कई टेलिकॉम ऑपरेटर्स e-SIM सर्विस ऑफर कर रहे हैं और इस सर्विस की मदद से बिना फोन में सिम कार्ड लगाए यूजर्स कंपनी की सर्विसेज ले सकते हैं। यानी कि बिना सिम कार्ड के कॉलिंग, डेटा और मेसेजिंग पहले की तरह ही की जा सकती है। हालांकि, इस e-SIM सर्विस के नाम पर फ्रॉड भी शुरू हो गया है और हैदराबाद में चार लोगों के 21 लाख रुपये e-SIM ऐक्टिवेशन के नाम पर लुट गए।नए-नए तरीके आजमाकर फ्रॉड करने वाले स्कैमर सबसे पहले एक सिंपल मेसेज भेजते हैं कि KYC अपडेट या पूरे डॉक्यूमेंट्स ना होने के चलते अगले 24 घंटे में सिम कार्ड ब्लॉक किया जा रहा है और इसके बाद यूजर्स को फंसा लेते हैं। मेसेज के बाद स्कैमर कस्टमर केयर बनकर कॉल करता है और फोन पर ही केवाईसी या बाकी जरूरी डॉक्यूमेंट्स कंप्लीट करने का ऑप्शन देता है, जिससे सिम कार्ड ब्लॉक ना किया जाए।

मिलता है फेक फॉर्म
यूजर्स को एक मेसेज भेजकर उसमें दिए लिंक पर क्लिक करने और फॉर्म में पूछी गई जानकारी भरने के लिए कहा जाता है। इस दौरान स्कैमर अपनी ईमेल आईडी विक्टिम के मोबाइल नंबर के साथ रजिस्टर कर लेते हैं और यूजर से e-SIM की रिक्वेस्ट कंपनी को भेजने के लिए कहते हैं। यह रिक्वेस्ट रजिस्टर्ड ईमेल आईडी की मदद से जाती है, जो स्कैमर्स की होती है। e-SIM सर्विस ऐक्टिवेट होने के बाद जेनरेट होने वाला QR कोड फ्रॉड करने वाले के ईमेल पर पहुंच जाता है।

स्कैमर को मिलता है OTP
QR कोड स्कैन करने के बाद स्कैमर के फोन पर यूजर का नंबर ऐक्टिवेट हो जाता है और यूजर का सिम कार्ड काम करना बंद कर देता है। फ्रॉड करने वाला पहले ही फॉर्म में यूजर के बैंकिंग डीटेल्स ले चुका होता है, इस तरह फ्रॉड करना आसान हो जाता है। बैकिंग डीटेल्स की मदद से पैसे ट्रांसफर करने का प्रोसेस शुरू होता है और OTP भी स्कैमर के उस हैंडसेट पर आते हैं, जिसमें e-SIM ऐक्टिव होता है। इस तरह विक्टिम का बैंक अकाउंट खाली हो जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान
बहुत जरूरी है कि स्कैम का तरीका समझा जाए, जिससे इससे बचकर रहा जा सके। किसी भी तरह से सिम ब्लॉक होने का मेसेज आए तो उसपर भरोसा ना करें और जरूरी होने पर खुद कस्टमर केयर को ऑफिशल नंबर पर कॉल कर लें। इसके अलावा केवाईसी से जुड़ा कोई प्रोसेस फोन पर नहीं होता, ऐसा करने से बचें। साथ ही किसी भी स्थिति में अपने बैकिंग डीटेल्स किसी के साथ शेयर ना करें। कोई भी टेलिकॉम कंपनी ऐसे डेटा की मांग यूजर से कॉल पर नहीं करती।

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