नारायणा अस्पताल में इलाज़ कराने गए युवक के परिजनों से 1 लाख नहीं मिलने से निकाल ली किडनी का आरोप

रायपुर। राजधानी रायपुर के देवेंद्र नगर स्थित नारायणा अस्पताल में एक बार फिर मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है ।आपको बता दें कि आरंग के बरभाठा गांव के निवासी हिरेश खूंटे के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर किडनी को निकालने का आरोप लगाया है। यह सच्चाई उनके सामने तब आई जब हिरेश का अंतिम संस्कार करने उसके परिजन श्मशान घाट पहुंचे थे और ठीक अंतिम संस्कार के पहले जब हरीश के शरीर को देखा गया तो उसके शरीर से किडनी गायब थी।

ज्ञात हो कि हिरेश अपने पैर में लगी चोट का इलाज कराने के लिए नारायणा अस्पताल पहुंचा हुआ था जहां उसे जबरदस्ती अस्पताल प्रशासन द्वारा कोविड-19 शिफ्ट कर दिया गया जिसके बाद लगातार उसकी तबीयत बिगड़ती गई और किसी भी डॉक्टर-नर्स ने उसे छुआ तक नहीं। परिजनों ने डॉक्टर युवराज खेमका पर आरोप लगाते हुए बताया कि जबरदस्ती कोविड रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद भी खेमका ने हरीश की रिपोर्ट को पॉजिटिव बताते हुए उसे कोविड वार्ड में भर्ती कर रखा व भारी मात्रा में दवाई मंगवाई व इलाज़ के लिए 1 लाख रुपयों की मांग करने लगे। इतना ही नहीं युवराज ने मरीज हिरेश के देहांत होने के बाद भी परिजनों को शव नहीं सौंपा। दो दिनों तक परिजन अस्पताल के चक्कर काटते रहे,अंत में जब हिरेश की बहन ने आत्महत्या कर लेने की बात कही तब कहीं जाकर अस्पताल प्रशासन ने शव को सौंपा।

अब परिजनों ने इस पूरे मामले की शिकायत जिला स्वास्थ्य अधिकारी व संबंधित अधिकारियों से की है, वही अधिकारियों द्वारा इस पर जांच कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच कर इंसाफ दिलाने की भी बात कही है।
हिरेश की बहन नैना खूंटे ने कहा कि नारायणा अस्पताल प्रशासन द्वारा लगातार इसी तरह पूरे 5 दिनों तक मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया व उन्हें हिरेश से भी मिलने की इजाजत नहीं दी गई। साथ ही हिरेश के देहांत के पश्चात भी डॉक्टर लगातार केवल पैसा जमा करने को लेकर दबाव बनाते रहे, जब उन्होंने अपने भाई को देखने के पश्चात ही पैसा देने की बात कही तो डॉ.खेमका पहले पैसा दोगे तभी भाई से मिलने देंगे कहकर बात को रफा-दफा कर दी जिसके बाद ही उन्होंने अपने मन मुताबिक हिरेश को कोविड पॉजिटिव बताते हुए नगर निगम को शव सौंपने की बात कही। जब परिजनों ने दबाव बनाया तब कहीं जाकर अस्पताल प्रशासन ने हिरेश का शव 2 दिनों के बाद परिजनों को सौंपा जिसके बाद उसका दाह संस्कार संपन्न हो पाया।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कुछ कार्यवाही करता भी है या नहीं? या फिर इसी तरह बड़ी राजनीतिक पहुँच के धनी नारायणा अस्पताल के प्रबंधक अपनी मनमानी करते हुए आम जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ करते रहेंगे और प्रशासन मुकबधिर बन चुप्पी साधे बैठे रहेगा।

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