BREAKING: हाथरस की घटना की सबसे पहले दी गई सूचना, जिसे राजनैतिक साजिश रचकर खेल खेला जा रहा कि योगी सरकार बदनाम हो

हाथरस। एजेंसी
मीडिया में इस समय हाथरस काण्ड की ही चर्चा है। मीडिया लड़की के साथ बलात्कार और मारने पीटने की बात कर रहा है और बलात्कार के दोषियों की फाँसी तक की माँग होने लगी है। लेकिन सच की पड़ताल करने को कोई भी तैयार नही है। क्या लड़की को सन्दीप सिंह व अन्य तीन लोगों ने मारा? क्या बाजरे के खेत में उसे घसीटकर ले जाया गया? क्या लड़की के साथ (गैंगरेप) बलात्कार किया गया? इस सभी सवालों के जवाब आज हम अपनी पड़ताल के बाद आपके सामने रख रहे हैं।
मीडिया ने इस मसले पर पूरे देश के लोगों को गुमराह किया है और सच की बजाय झूठ फैलाया है। लड़की को उसके भाई और माँ ने बुरी तरह मारा पिटा और सन्दीप के ख़िलाफ़ मारपीट और दलित एक्ट का मुक़दमा लिखा दिया। पूरी कहानी इस तरह है।

हाथरस जिले के चंदपा थाने से एक किलोमीटर की दूरी पर है गाँव बुलगढी। सन्दीप सिंह इसी गाँव का रहने वाला है। पीड़ित लड़की से कुछ महीने पहले सन्दीप का प्रेम प्रसंग हो गया। छिपकर यह मामला चल रहा था तभी लड़की के परिवार वालों को यह बात पता चल गई। इसे लेकर सन्दीप के परिजनों व लड़की के भाई व पिता के बीच कहा सुनी भी हुई थी। मामला गाँव तक ही रहा। बावजूद इसके दोनो का मिलना जुलना जारी रहा। सन्दीप ने लड़की से बात करने के लिये उसे एक नया मोबाइल भी दिया था। जब इसकी जानकारी भाई व माँ को हुई तो उन्होंने उसे तोड़कर फेंक दिया। संदीप के चाचा दिल्ली में रहते हैं। सन्दीप के परिवार वाले भी नही चाहते थे कि वह उस लड़की से मिले लेकिन उसे रोक नही पाये। इसी वजह से तीन- चार महीने पहले सन्दीप को उसके चाचा दिल्ली लेकर चले गये। घटना के चार दिन पहले ही सन्दीप दिल्ली से वापस गाँव आया था। 14 सितम्बर को पीड़ित लड़की अपनी माँ के साथ घर के सामने थोड़ी दूर पर घास काट रही थी। वहीं पर सन्दीप आ गया और दोनो में बातचीत होने लगी। गाँव के एक व्यक्ति का कहना है सन्दीप ने लड़की को फिर से नया मोबाइल दिया ताकि वह उससे बात कर सके। लड़की के भाई ने सन्दीप को अपनी बहन से बात करते देख लिया और मौक़े पर आ गया। दोनो में वहाँ कहसुनी हुई और सन्दीप वहाँ से चला गया। उसके बाद भाई ने अपनी बहन के साथ जमकर मारपीट की। मारपीट के दौरान ही वह लड़की एक कँटीले तार पर गिर गई जिससे उसकी जीभ में घाव हो गया। लड़की चिल्लाती रही लेकिन भाई ने मारना बंद नही किया। माँ ने भी इस मारपीट में हिस्सा लिया। हालत यह हो गई कि लड़की वहीं पर खेत के बग़ल में मेड़ के किनारे बेहोश हो गई और भाई वहाँ से घर चला गया। लड़की के चिल्लाने की आवाज़ पर गाँव का ही एक लड़का लवकुश वहाँ आया और माँ के कहने पर लड़की के मुँह पर पानी मारा और पानी भी पिलाया। उसके बाद लड़की को सहारा देकर माँ उसे घर तक ले गई। लड़की को बाजरे के खेत में ले जाने व नंगी मिलने की बात पूरी तरह से गलत है। घर जाने के बाद भाई ने पुलिस को सूचना दी और सन्दीप व लवकुश समेत चार लोगों के ख़िलाफ़ मारपीट व दलित एक्ट का मुक़दमा लिखाया। लड़की को बग़ल के अस्पताल में इलाज के लिये ले जाया गया। बाद में मेडिकल कालेज से होते हुए लड़की को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती किया गया जहां उसकी 30 सितम्बर की सुबह मौत हो गई। दो दिन बाद चारों लड़कों को गिरफ़्तार कर लिया गया। जब इसकी जानकारी सांसद व कुछ स्थानीय नेता को हुई तो वह और उनका परिवार इसे राजनीतिक रंग देने में लग गया। वहीं से इस घटना में बलात्कार का एंगिल शामिल हुआ। मीडिया इसे गैंग रेप बताकर चीखने लगा। सभी चैनलों के रिपोर्टेर मौक़े पर गये लेकिन कोई भी सच जानने की कोशिश में नही लगा। यह देश के लिये कितना दुर्भाग्यपूर्ण है। पुलिस प्रशासन ने गलत किया कि रात में उसके शव को बिना परिवार की मर्ज़ी के जला दिया। यह नही होना चाहिये था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में नार्को टेस्ट के लिये आख़िर क्यूँ कहा है? मेरी समझ के मुताबिक़ इसीलिये ताकि उसमें लड़की के भाई और माँ सच उगल देंग़े। मेरी राय में घटना को सरकार को सीबीआई को दे देना चाहिये। वह सच सबके सामने रख देगी, मीडिया का भी सच।
प्रशासन व पुलिस ने इस घटना में कई ग़लतियाँ की।
रात में शव को नही जलाना चाहिये था।
मीडिया को गाँव में जाने से नही रोकना चाहिये था। मीडिया जाती तो गाँव के लोग तो असलियत बताते।
पूरा गाँव जान रहा है कि सच क्या है?
एक बार फिर कह रहा हूँ कि मीडिया का काम केवल सेंशेसन फैलाना नही है उसे सच को सामने रखना चाहिए।

राष्ट्रीय सहारा के वरिष्ठ पत्रकार देवकीनंदन मिश्रा की रिपोर्ट…

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