शातिर ठग: आईपीएस की वर्दी, सर्विस रिवॉल्वर का कवर और फोन पर रौब! ऐसा ठग जिसने पुलिस को भी नहीं छोड़ा, ऐसे चढ़ा हत्थे

नई दिल्ली: आपने ठगी की कई कहानियां सुनी होंगी। अक्षय कुमार की फिल्म स्पेशल 26 भी देखी होगी। जिसमें ठगी का पूरा गैंग फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर बड़े—बड़े लोगों को ठगता है। लेकिन कहते हैं अपराध के अंत का एक दिन जरूर आता है। यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यह कहानी एक ऐसे ठग की है, जिसने अपनी ठगी का शिकार पुलिस को भी बना डाला।

मुंबई पुलिस ने बेंगलुरु से एक फर्जी आईपीएस अधिकारी को गिरफ्तार किया है। जिसने सूरत पोर्ट स्थित माल को आयात करने के लिए सूरत के एक व्यवसायी से संपर्क कर अपहरण कर लिया। आरोपी फर्जी आईपीएस (Fake IPS) कारोबारी को सूरत ले गया, जहां 15 लाख रुपये नकद, आईफोन और ऐप्पल वॉच फिरौती के तौर पर ले ली। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के अधिकारियों ने राजस्थान के एक 38 वर्षीय व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। जिसने भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी के रूप में खुद को पेश किया और सूरत के एक व्यवसायी को मरीन ड्राइव के एक प्रसिद्ध होटल से अपहरण कर लिया। दरअसल, सूरत के इस व्यापारी के खिलाफ राजस्व खुफिया निदेशालय में शिकायत दर्ज की गई थी। इसी जानकारी को जुटाकर उसने ठगी की इस घटना को इस तरह अंजाम दिया कि हर कोई दंग रह गया।

पुलिस ने आरोपी को 24 घंटे से अधिक समय तक गुजरात से बेंगलूरु तक सैकड़ों किलोमीटर तक सड़क पर घेरे रखा, इससे पहले कि उसे गिरफ्तार किया जा सके। जांच में पता चला है कि आरोपी बड़े व्यापारियों से एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के रूप में पैसा वसूलता है। इस शातिर की पहचान राजस्थान के अजमेर जिले के ब्यावर निवासी 38 वर्षीय शिव शंकर शर्मा (Shiv Shankar Sharma) के तौर पर की गई है। शर्मा को सूरत के निवासी मोहम्मद एहतेशाम असलम नवीवाला की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया है, जो कपड़ा निर्यात कारोबार में हैं।

यहां से शुरू होती है कहानी…

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार, कुछ हफ्ते पहले, नवीवाला को शर्मा का फोन आया। फोन पर रौब झाड़ते हुए बोला कि वह एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी है और नवीवाला के खिलाफ डीआरआई में सीमा शुल्क और निर्यात-मानदंडों से संबंधित उल्लंघनों के बारे में शिकायत दर्ज है। शर्मा ने नवीवाला को मध्यस्थता कर मामले को सुलझाने की बात कही। उसने नवीवाला को मरीन ड्राइव के एक चार सितारा होटल में बुलाया।

होटल के कमरे में शर्मा ने बड़ी राशि के भुगतान के लिए मामले को निपटाने की बात कही। इससे नवीवाला, शर्मा और उसके सहयोगियों के बीच बहस शुरू हो गई। इसके बाद नवीवाला के साथ मारपीट की गई, उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उसे कमरे में कैद कर दिया। बाद में धमकाया, बंदूक की नोंक पर उसका अपहरण कर लिया और फिरौती लेने के लिए उसे गुजरात ले गए।

अपराध शाखा के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि व्यापारी नवीवाला को 16 लाख रुपये नकद देने के बाद ही छोड़ा गया। घटना के बाद, नवीवाला ने पहले गुजरात पुलिस और फिर मुंबई पुलिस से संपर्क किया। मरीन ड्राइव होटल के साथ प्रारंभिक पूछताछ के बाद मरीन ड्राइव पुलिस ने पिछले हफ्ते एक मामला दर्ज किया। जैसा कि मामला प्रकृति में गंभीर था, वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को देखने के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच के एंटी एक्सटॉर्शन सेल (AEC) के अधिकारियों से संपर्क कर तुरंत कार्यवाही करने को कहा।

अधिकारी ने कहा कि एईसी के अधिकारियों ने गुजरात में शर्मा के स्थान का पता लगाने के लिए विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त तकनीकी निगरानी और सूचना का इस्तेमाल किया। एक एईसी टीम तब गुजरात गई थी, लेकिन शातिर शर्मा अपने स्थानों को बदलता रहा। अधिकारी ने कहा, हमने सड़क मार्ग के जरिए 24 घंटे से अधिक समय तक गुजरात से बेंगलुरु तक उसका पीछा किया और आखिरकार मंगलवार को बेंगलुरु में उसे पकड़ लिया।

पूछताछ के दौरान पता चला कि शर्मा को एक सहयोगी के माध्यम से पता चला था कि डीआरआई में नवीवाला के खिलाफ एक शिकायत थी और इसलिए उसने व्यवसायी से पैसे निकालने की साजिश रची। जांचकर्ताओं ने यह भी जान लिया कि शर्मा का एक कुख्यात अतीत है। वह पिछले साल एक आईपीएस अधिकारी के रूप में गिरफ्तार हो चुका है। मध्य प्रदेश में कई लाख रुपये का कांड कर चुका है। यहां तक कि शर्मा इतना शातिर है कि उसने कथित तौर पर गुजरात में एक महिला पुलिस अधिकारी को अपने जाल में फंसा लिया। उससे शादी करने का वादा करके और फिर मोटी रकम लेने के बाद धोखा दे दिया।

आरोपी गैरकानूनी रूप से प्राप्त धन को अपनी लैविश लाइफ में खर्च करता है। उसके पास एक कार, एक वरिष्ठ IPS अधिकारी की वर्दी और कार में सर्विस पिस्टल का कवर मिला है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि वह अपने पीड़ितों को पुलिस विभाग और मंत्रियों के बीच सांठगांठ का हवाला देकर ठगता था। शर्मा पर धारा 170 (एक लोक सेवक का प्रतिरूपण), 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र), 323 (असाल्ट), 342 (गलत कारावास), 364 ए (फिरौती के लिए अपहरण), 386 (चोट के डर से किसी व्यक्ति को लगाकर अपहरण करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। भारतीय दंड संहिता के 504 (दुरुपयोग) और 34 (आम इरादे) और शस्त्र अधिनियम के 3 और 25 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। वर्तमान में वह पुलिस हिरासत में है।

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