इमरान के खिलाफ PAK में जबरदस्त असंतोष, ‘सैन्य कठपुतली’ से ज्यादा नहीं हैसियत

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की असलियत पहले से ही सबके सामने है. इमरान खान और पाकिस्तान की पोल अब वहां के सांसद, विधायक और कई नेता भी खोल रहे हैं. खुल के इमरान को ‘सैन्य कठपुतली’ बताया जा रहा है. कई पाकिस्तानी नेताओं ने देश की बद्तर स्थिति, खराब कानून व्यवस्था, पड़ोसियों से खराब रिश्ते के लिए वहां सेना का हावी होना बताया है.

पश्तून नेता और पूर्व सीनेटर अफरासियाब खट्टक ने SAATH के पांचवें वार्षिक सम्मेलन में पाकिस्तान में अघोषित मार्शल लॉ लागू बताया. एक बयान के अनुसार, SAATH के पिछले वार्षिक सम्मेलन लंदन और वाशिंगटन में आयोजित किए जा चुके हैं, लेकिन इस वर्ष प्रतिभागियों की वर्चुअली मुलाकात हुई. इस दौरान तमाम वक्ताओं ने प्रधानमंत्री इमनरान खान को एक सैन्य कठपुतली बताया. SAATH लोकतंत्र समर्थक पाकिस्तानियों का एक समूह है जिसकी स्थापना पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी मोहम्मद ताकी ने की है.

SAATH के पांचवें वार्षिक सम्मेलन में राजनेता, पत्रकार, ब्लॉगर, सोशल मीडिया कार्यकर्ता और सिविल सोसाइटी के सदस्य शामिल रहे जिनमें से कई बाहर अन्य देशों में निर्वासन झेलने को मजबूर हैं. एक बयान में कहा गया कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले दिनों SAATH की बैठकों को बाधित करने की कोशिश की और पाकिस्तान में रहने वाले साथ के सदस्यों को विदेश यात्रा पर जाने से प्रतिबंधित कर दिया. लेकिन इस वर्ष, वर्चुअल मीटिंग हुई. खट्टक ने पाकिस्तान से सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘यह पाकिस्तान में सबसे खतरनाक मार्शल लॉ है क्योंकि इसने संवैधानिक संस्थानों को विकृत कर दिया है. मौजूदा सैन्य शासन राजनीतिक संस्थानों का प्रतिनिधित्व कर रहा है, जो इस हद तक जा रहा है कि खुफिया एजेंसियां संसद के सदस्यों को सत्र में भाग लेने के लिए और वोट देने के लिए नहीं आने के लिए निर्देशित करती हैं.’

विश्व सिंधी कांग्रेस की रुबीना ग्रीनवुड, गिलगित-बाल्टिस्तान की ताहिरा जबीन, सेराकी आंदोलन के शहजाद इरफान, और पश्तून काउंसिल ऑफ अमेरिका के रसूल मोहम्मद सहित कई वक्ताओं ने जोर दिया कि पाकिस्तान में तमाम अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किया जा रहा है और उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है. सम्मेलन में प्रमुख वक्ताओं में पश्तून महिला कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल, निर्वासित पत्रकार ताहा सिद्दीकी और ताहिर गोरा, और मानवाधिकारों के रक्षक मारवी सिरमद शामिल थे.

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