आदिवासी के धान की खड़ी फसल को किया गया नष्ट, कृषक द्वारा थाना प्रभारी, एस.डी.एम., तहसीलदार, पुलिस अधीक्षक तथा जिला कलेक्टर से लिखित शिकायत के माध्यम से किया गया न्याय की मांग…

बिलासपुर। संजय मिश्रा
मानव जीवन की वर्तमान स्थिति वैश्विक महामारी कोरोना के वजह से अत्यंत प्रभावित हुई है, लोगों के समक्ष अनेक प्रकार की परेशानियां कमर कस कर खड़ी हुई है, ऐसी स्थिती में निम्नलिखित घटना वाकई मन को झकझोर देनें वाली है,छत्तीसगढ़ प्रदेश के न्यायधानी बिलासपुर जिला अंतर्गत जनपद पंचायत बिल्हा के ग्राम पंचायत ऐठुलकाॅपा में एक आदिवासी कृषक चन्दूराम, पिता- रामभरोस गोंड़ के बताए अनुसार अपनी खुद की स्वामित्व हक की कृषि भूमि दो एकड़ पच्चीस डिसमिल पर सफरी धान का बोंवाई किया गया था जो फसल पूरी तरह से पककर काटने योग्य हो चुका था, तब अचानक विगत 28-10-2020 को धान की लहलहाती फसल सूखती हुई प्रतीत हुआ, तब फसल की निगरानी और तेज करनी पड़ी, और धान की खड़ी फसल लगातार सूखनें लगी, तीसरे दिन की आधी रात लगभग 12 बजे उक्त फसल पर स्प्रेयर मशीन चलनें की आवाज सुनाई पड़ी आदिवासी कृषक नें दूर से ही आवाज लगाते हुए अपनें फसल के पास जाकर देखा तो ग्राम पंचायत ऐठुलकाॅपा के ही गुहा भारती, पिता- जीवन भारती के द्वारा स्प्रेयर के माध्यम से लहलहाती धान की खड़ी फसल को नष्ट किया जा रहा था, और नरेन्द्र भारती, पिता- गुहा भारती तथा संजू भारती, पिता- नरेन्द्र भारती खेत के मेंड़ में लाठी लेकर खड़े थे,

नरेन्द्र भारती की पत्नि अपनें घर के पास खड़े होकर गाली-गलौज कर रही थी,जब आदिवासी कृषक अपनें फसल के करीब पहुंचा तो गुहा भारती, पिता- जीवन भारती नें अपनें दोनों लठैतों को आदेश दिया कि जो आदिवासी कृषक आया है उसे जान से मार दो,तब आदिवासी कृषक नें अपनी जान बचाकर सीधे भागते हुए अपनें घर पहुंच कर घर वालों को आपबीती सुनाई, चूँकि रात ज्यादा हो गई थी इस कारण से दूसरे दिन ग्राम के प्रमुख व्यक्तियों, पंच, सरपंच के सलाह अनुसार बिल्हा थाना प्रभारी, बिल्हा एस.डी.एम., बिल्हा तहसीलदार, बिलासपुर जिला पुलिस अधीक्षक एवं बिलासपुर जिला कलेक्टर से लिखित शिकायत के माध्यम से न्याय की गुहार लगाई गई है,आदिवासी कृषक नें यह भी बताया कि हमारे पांच सदस्यीय परिवार के जीविकोपार्जन का एकमात्र सहारा यही फसल ही था जो कि पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है,

देखिए विडियो…

अब इस खबर के प्रसारण उपरांत देखनें वाली बात यह होगी कि क्या पीड़ित आदिवासी कृषक के साथ हुए इस अमानवीय व्यवहार पर संबंधित उच्च अधिकारी उचित कार्रवाई कर न्याय दिला पाते हैं या फिर बेबस, लाचार, गरीब आदिवासी कृषक न्याय पानें के लिए दर-दर भटकते रहेंगे।

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