Dhanteras 2020 : धनतेरस की पौराणिक कथा…

धनतेरस की पौराणिक कथा…

जब मां लक्ष्मी ठहर गईं एक किसान के घर,
लक्ष्मी जी से रहा न गया और जैसे ही भगवान आगे बढ़े लक्ष्मी भी पीछे-पीछे चल पड़ीं, कुछ ही आगे जानें पर उन्हें सरसों का एक खेत दिखाई दिया जिसमें खूब फूल लगे हुए थे, सरसों की शोभा देखकर वह मंत्रमुग्ध हो गईं और फूल तोड़कर अपना श्रृंगार करनें के बाद आगे बढ़ीं, आगे जानें पर एक गन्नें के खेत से लक्ष्मी जी गन्नें तोड़कर रस चूसनें लगीं,
कहा जाता है कि एक समय भगवान विष्णु मृत्युलोक में विचरण करनें के लिए आ रहे थे तब लक्ष्मी जी नें भी उनसे साथ चलनें का आग्रह किया, तब विष्णु जी नें कहा कि यदि मैं जो बात कहूं तुम अगर वैसा ही मानो तो फिर चलो, तब लक्ष्मी जी उनकी बात मान गईं और भगवान विष्णु के साथ भूमंडल पर आ गईं, कुछ देर बाद एक जगह पर पहुंचकर भगवान विष्णु ने लक्ष्मी जी से कहा कि जब तक मैं न आऊं तुम यहां ठहरो, मैं दक्षिण दिशा की ओर जा रहा हूं, तुम उधर मत आना, विष्णुजी के जानें पर लक्ष्मी के मन में कौतुहल जागा कि आखिर दक्षिण दिशा में ऐसा क्या रहस्य है जो मुझे मना किया गया है, और भगवान स्वयं चले गए,
उसी क्षण विष्णु जी आए और यह देख लक्ष्मी जी पर नाराज होकर उन्हें शाप दे दिया कि मैंने तुम्हें इधर आनें को मना किया था,पर तुम नहीं मानीं और किसान की चोरी का अपराध कर बैठी, अब तुम इस अपराध के जुर्म में इस किसान की 12 वर्ष तक सेवा करो, ऐसा कहकर भगवान उन्हें छोड़कर क्षीरसागर चले गए, तब लक्ष्मी जी उस गरीब किसान के घर रहनें लगीं,
एक दिन लक्ष्मी जी नें उस किसान की पत्नी से कहा कि तुम स्नान कर पहले मेरी बनाई गई इस देवी लक्ष्मी का पूजन करो, फिर रसोई बनाना, तब तुम जो मांगोगी मिलेगा, किसान की पत्नी ने ऐसा ही किया, पूजा के प्रभाव और लक्ष्मी की कृपा से किसान का घर दूसरे ही दिन से अन्न,धन,रत्न,स्वर्ण आदि से भर गया, लक्ष्मी जी नें किसान को धन-धान्य से पूर्ण कर दिया, किसान के 12 वर्ष बड़े आनंद से कट गए, फिर 12 वर्ष के बाद लक्ष्मी जी जानें के लिए तैयार हुईं,
विष्णु जी लक्ष्मी जी को लेने आए तो किसान नें उन्हें भेजने से इंकार कर दिया, तब भगवान नें किसान से कहा कि इन्हें कौन जाने देता है, यह तो चंचला हैं, कहीं नहीं ठहरतीं, इनको बड़े-बड़े नहीं रोक सके, इनको मेरा शाप था इसलिए 12 वर्ष से तुम्हारी सेवा कर रही थीं, तुम्हारी 12 वर्ष सेवा का समय पूरा हो चुका है, किसान हठपूर्वक बोला कि नहीं अब मैं लक्ष्मीजी को नहीं जानें दूंगा,
तब लक्ष्मी जी नें कहा कि हे किसान तुम मुझे रोकना चाहते हो तो जो मैं कहूं वैसा करो, कल तेरस है, तुम कल घर को लीप-पोतकर स्वच्छ करना, रात्रि में घी का दीपक जलाकर रखना और सायंकाल मेरा पूजन करना और एक तांबे के कलश में रुपए भरकर मेरे लिए रखना, मैं उस कलश में निवास करूंगी, किंतु पूजा के समय मैं तुम्हें दिखाई नहीं दूंगी,
इस एक दिन की पूजा से वर्ष भर मैं तुम्हारे घर से नहीं जाऊंगी, यह कहकर वह दीपकों के प्रकाश के साथ दसों दिशाओं में फैल गईं, किसान नें लक्ष्मी जी के कथानुसार पूजन किया, उसका घर धन-धान्य से पूर्ण हो गया, इसी वजह से हर वर्ष तेरस के दिन लक्ष्मी जी की पूजा होने लगी।

पं. संजय मिश्रा

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