महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या में नहीं आ रही कमी, दुष्कर्म के 1,429 मामले आए सामने

यह काफी गंभीर स्थिति है की महिलाओ पर होने वाले घटनाओ में कोई और किसी भी प्रकार की कमी नहीं आई है,न्याय के लिए एक ठोस कदम को देखती पीड़िता व उसके परिवार, दोषियों के खिलाफ कैंडल मार्च निकालते जनता, और उन पर हर दिन रेप और छेड़खानी की मामले,ऐसा बिलकुल भी नहीं लगता की लोगो पर ना कानून का डर है ना ही उन्हें सभ्य बने रहने की कोई जरुरत, इन सब के बीच फिर से कुछ व्यक्ति यही बोलते हुए नजर आ जाते है की महिलाओ को ही पुरे देश की संस्कृति सम्हालनी होगी.आकड़ो में आई उछाल तो वैसे इसी चीज को दर्शाती है की लोगो के नैतिक मूल्यों में आज भी भारी कमी है, घर से अगर शुरुआत की जाए तो शायद पुरष को यह सीखने में मदद मिलेगी कि हर महिलये उनकी जिम्मेदारी है न कि मौका. सिर्फ रेप नहीं बल्कि घरेलु मामले lockdown के साथ बढ़ते ही चले गए . और पुरुषों की आक्रामकता खोने की एक व्याग्रा छमता भी ढीली पड़ती नजर आयी.
राष्ट्रीय राजधानी में इस साल अक्टूबर तक दुष्कर्म के 1,429 मामले सामने आए हैं। पिछले साल इसी अवधि में दिल्ली में दुष्कर्म के 1,884 मामले सामने आए थे, जो साल खत्म होने तक बढ़कर 2,168 मामले हो गए। 2012 में कुल 706 रेप केस दर्ज किए गए थे, जिसमें 16 दिसंबर को निर्भया के साथ नृशंस गैंगरेप भी शामिल था।
दिल्ली पुलिस ने इस साल अक्टूबर तक महिलाओं पर हमले के कुल 1,791 मामले दर्ज किए। इसकी तुलना में 2019 में इसी अवधि के दौरान 2520 मामले दर्ज किए गए, जो साल के अंत तक बढ़कर 2,921 हो गए। 2012 में इसी अपराध के लिए कुल 727 मामले दर्ज किए गए थे।

2019 में इसी अवधि में 2,988 सूचित आंकड़ों के मुकाबले इस साल अक्टूबर तक कुल 2,226 महिलाओं का अपहरण किया गया था। 2019 के अंत तक दिल्ली में महिलाओं के अपहरण के 3,471 मामले सामने आए। 2012 में महिलाओं के अपहरण के कुल 2,048 मामले दर्ज किए गए थे।

दिल्ली पुलिस ने इस साल अक्टूबर तक आईपीसी की धारा 498-ए/406 के तहत 1,931 मामले दर्ज किए। पिछले साल इसी अवधि के दौरान कुल 3,052 मामले दर्ज किए गए थे, जो साल खत्म होने के समय तक बढ़कर 3,792 हो गए। 2012 में दिल्ली पुलिस ने महिलाओं के पति और ससुराल वालों के खिलाफ 2,046 मामले दर्ज किए थे।

दिल्ली पुलिस ने इस साल अक्टूबर तक दहेज हत्या के 94 मामले भी दर्ज किए हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में इसी प्रकृति के 103 मामले दर्ज हो रहे हैं। साल 2012 में दिल्ली पुलिस ने दहेज हत्या के कुल 134 मामले दर्ज किए थे।

बेहतर होगा लोग आधुनिकता के नाम पर अपने नैतिक मूल्यों से भी जुड़े रहे, अपने घर से संस्कार की शुरुआत करे, व सोशल मीडिया का कम से कम उपयोग करे.

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