सिर्फ भारत के पास यह अचूक हथियार, दुश्मनों खबरदार! 

नई दिल्ली : रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित स्वदेशी हथियार के परीक्षण का वीडियो मात्र ही उग्रवादी पड़ोसियों के पसीने छुड़ाने के लिए काफी है। हॉवित्जर एटीएजीएस (उन्नत तोपखाना प्रणाली) का ओडिशा के बालासोर फायरिंग रेंज में शनिवार को परीक्षण किया गया। डीआरडीओ के एटीएजीएस प्रोजेक्ट डायरेक्टर शैलेंद्र गाडे ने कहा, यह दुनिया की सबसे अच्छी तोप है। अभी तक कोई दूसरा देश ऐसी तोप विकसित करने में सक्षम नहीं है।
शैलेंद्र गाडे ने कहा, इस तोप को तीन साल के भीतर डिजाइन किया गया और परीक्षण के लिए रखा गया। जल्द ही, इसको पीएसक्यूआर परीक्षणों के अधीन किया जाएगा। हम उम्मीद कर रहे हैं कि तोपखाना प्रणाली क्षेत्र में भारत के पास सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। गौरतलब है कि सरकार स्वदेशी तकनीक के जरिए हथियारों को बनाने पर जोर दे रही है ताकि देश को रक्षा क्षेत्र में विदेशियों पर निर्भर होने के बजाय आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

बता दें कि गन सिस्टम भारतीय सेना में दिग्गज बोफोर्स की तुलना में दुनिया के किसी भी अन्य तोपखाने से बेहतर है जिसमें इजरायल का एटीएचओएस गन भी शामिल है।

इस हथियार की खासियत

डीआरडीओ के एक शीर्ष वैज्ञानिक ने कहा कि हॉवित्जर एटीएजीएस 48 किलोमीटर की सबसे लंबी दूरी तक लक्ष्य पर प्रहार करने की क्षमता वाली दुनिया की सबसे अच्छी तोप है। स्वदेशी बंदूक 1800 तोपखाने प्रणालियों की भारतीय सेना की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है और इसमें कोई कमी नहीं थी। फील्ड ट्रायल के वैज्ञानिक शैलेन्द्र वी गडे ने कहा कि एटीएजीएस की मदद से वे 2,000 से अधिक राउंड फायरिंग कर चुके हैं।

सीडीएस रावत – ‘स्वदेशी निर्भता’ से युद्ध जीतेगा भारत

चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा पर जारी तनाव के बीच चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत ने शुक्रवार को बड़ा बयान देते हुए कहा था कि भविष्य में होने वाली जंग को भारत स्वदेशी हथियारों से लड़ेगा और दुश्मनों को हराएगा। हम देख रहे हैं कि रक्षा क्षेत्र को लेकर हमारा निजी उद्योग भी प्रेरित है, उन्हें समर्थन की जरूरत है। मुझे लगता है कि भविष्य में होने वाले युद्ध को हम स्वदेशी हथियारों के माध्यम से जीतेंगे।

रावत ने कहा, वर्तमान समय में हमारा देश उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। देश जिस रफ्तार से आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा रहा है। ये बेहद जरूरी है कि डीआरडीओ पूरी लगन के साथ काम करता रहे।

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