Christmas special: जानिए कौन थे बच्चों को गिफ्ट बांटने वाले सेंटा क्लॉज

वेबडेस्क | बचपन में हर बच्चे को सेंटा क्लॉज की कहानी जरूर सुनाई जाती है. हर साल क्रिसमस के मौके पर सफेद दाड़ी और बालों वाला सेंटा लाल रंग के कपड़े और टोपी लगाकर आता है. उसके हाथ में एक पोटली जैसा बैग होता है जिसमें ढेर सारे गिफ्ट होते हैं जिन्हें वो बच्चों के बीच बांटता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों को उपहार देने वाला असल सेंटा कौन था. आइए हम आपको बताते हैं…संत निकोलस थे असली सेंटा

उत्तरी ध्रुव में स्थित मायरा में एक रईस परिवार में तीसरी शताब्दी में संत निकोलस का जन्म हुआ था. इन्हें ही असली सेंटा कहा जाता है. ये बचपन में ही अनाथ हो गए थे. उसके बाद इनकी आस्था यीशु में बढ़ गई और ये उन्हें ही अपना माता पिता मानने लगे और बड़े होकर ईसाई पादरी बन गए. लोगों की मदद करना उनका शौक था संत निकोलस को शुरू से ही लोगों की मदद करना बहुत अच्छा लगता था. जो लोग खासकर बच्चे परिस्थितियों के चलते अपनी इच्छाओं को पूरा नहीं कर पाते थे, ऐसे लोगों को वे क्रिसमस के दिन उपहार के रूप में खुशियां बांटा करते थे. लेकिन वे अपनी पहचान किसी को नहीं बताना चाहते थे, इसलिए वे आधी रात में वेष बदलकर घर से निकलते थे और बच्चों व जरूरतमंदों को तमाम उपहार बांटते थे.

वर्ष 1930 में आया सेंटा का नया रूप आधुनिक युग के सेंटा वर्ष 1930 में अस्तित्व में आए जब हैडन संडब्लोम नामक एक कलाकार कोकाकोला की एड में सेंटा के रूप में 35 वर्षों तक दिखाई दिया. लाल कपड़े में सफेद दाढ़ी वाले सेंटा का ये नया रूप बच्चों को बहुत पसंद आया. इसके बाद से सेंटा का क्रेज बढ़ता चला गया और वे बच्चों के चहेते बन गए. संत निकोलस के दरियादिली की मशहूर कहानी संत निकोलस की दरियादिल‍ी की एक बहुत ही मशहूर कहानी है कि उन्होंने एक ऐसे गर‍ीब की मदद की थी जिसके पास अपनी तीन बेटियों की शादी के लिए पैसे नहीं थे. वो शख्स मजबूरन अपनी बेटियों को मजदूरी और देह व्यापार के दलदल में भेज रहा था. तब निकोलस ने चुपके से उसकी तीनों बेटियों की सूख रही जुराबों में सोने के सिक्कों की थैलियां रख दी और उन्हें लाचारी की जिंदगी से मुक्ति दिलाई. तब से क्रिसमस की रात बच्चे इस उम्मीद के साथ अपने मोजे बाहर लटकाते हैं कि सुबह उसमें उनके लिए गिफ्ट्स मिलेंगे.

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