कितना खतरनाक है बर्ड फ्लू, अंडा-चिकन खाएं या नहीं, जानें हर सवाल का जवाब

कोरोना (Corona) के विरुद्ध अभी युद्ध खत्म भी नहीं हुआ कि बर्ड फ्लू (Bird Flu) देश में अपने पंख फैला रहा है. कुछ दिनों पहले देश के अलग-अलग राज्यों से पक्षियों के मरने की खबरें आनी शुरू हुईं, जो अब करीब 7 राज्यों तक फैल गई हैं.
आज हम आपको 3 ज़रूरी बातें बताएंगे. सबसे पहले जानेंगे कि बर्ड फ्लू से आपको खतरा है या नहीं. दूसरी बात- क्या आपको अपने खान-पान में कोई बदलाव लाने की जरूरत है, यानी क्या आपको अंडा या चिकन खाना छोड़ देना चाहिए. और तीसरी बात- बर्ड फ्लू का हमारे देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा ? इसके अलावा हम आज आपको बर्ड फ्लू से जुड़े आपके मन में आ रहे तमाम सवालों के जवाब देंगे.
फिलहाल राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और केरल में बर्ड फ्लू की पुष्टि कर दी गई है. जबकि पंजाब, झारखंड और मध्य प्रदेश जैसे राज्य हाई अलर्ट पर हैं. मुर्गियों के अलावा कौवे, बतख, बगुले और मोर जैसे पक्षियों की भी मौत हो रही है. राजस्थान के कुछ इलाकों में तो धारा 144 भी लगानी पड़ी है.
आप सभी को ये जनना ज़रूरी है की बर्ड फ्लू एक वायरल इंफेक्शन की तरह है जो ना सिर्फ पक्षियों को संक्रमित करता है. बल्कि दूसरे जानवरों या इंसानों को भी अपनी चपेट में ले सकता है. लेकिन इसका मतलब ये नहीं है की आप पैनिक में आ जाए. हाँ सावधानी बहुत जरूरी है. आपके मन में बर्ड फ्लू को लेकर कई सवाल आ रहे होंगे. ऐसे कई सवालो के जवाब हमने आपके लिए रिसर्च कर तैयार किये है.
पहला सवाल, जो आज कई लोगों ने हमसे पूछा. क्या अंडा खाने से बर्ड फ्लू हो जाएगा? इसका जवाब है, नहीं. लेकिन Experts की राय है कि अंडा हो या मीट आपको ये चीजें अच्छी तरह से उबाल कर खानी चाहिए.
दूसरा सवाल, आखिर ये वायरस पक्षियों से इंसान में कैसे चला जाता है? दरअसल, बर्ड फ्लू पालतू मुर्गियों में आसानी से फैल जाता है. ऐसे पक्षी के मुंह, नाक या आंखों को अगर कोई इंसान छूता है, तो उसे भी बर्ड फ्लू हो सकता है.
तीसरा सवाल, क्या पक्षियों से इंसान में इस वायरस के ट्रांसफर होने का कोई उदाहरण है? इसका जवाब है हाँ, बिल्कुल है. पहला ऐसा मामला 1997 में हॉन्ग कॉन्ग में आया था. माना जाता है कि उस आदमी में पोल्ट्री फार्म की मुर्गियों से ये वायरस आया था.
चौथा सवाल बर्ड फ्लू के लक्षण क्या होते हैं? जवाब है कफ, डायरिया, बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश के अलावा सांस से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं. लेकिन आपको फिर एक बार बता दें. ये खतरा उन्हीं लोगों को है, जो संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में हैं.

बर्ड फ्लू से होगा अर्थव्यवस्था पर नुकसान

अब आप ये समझिए कि बर्ड फ्लू से आपकी और देश की अर्थव्यवस्था को कितना बड़ा नुकसान हो सकता है. हमारे देश में करीब 10 करोड़ लोग मुर्गी पालन से जुड़े हुए हैं. जिनमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार से लेकर तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश तक कई राज्यों के लोग शामिल हैं. पोल्ट्री फार्म हर रोज करीब 25 करोड़ अंडों का उत्पादन करते हैं. देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP में इन पोल्ट्री फॉर्म का योगदान 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होता है.
ध्यान देने की बात ये है कि साल 2004 में भी बर्ड फ्लू आया था और उस वक्त भारत के पोल्ट्री फॉर्म को करीब 800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था. तब उत्तर भारत में चिकन और अंडों की बिक्री में 40 प्रतिशत तक गिरावट आ गई थी.
सोचिये अगर बर्ड फ्लू लंबा चला तो इस बार भी दिक्कत हो सकती है और ध्यान रहे कि कोरोना की वजह से पोल्ट्री उद्योग को पहले ही भारी नुकसान हो चुका है. आपको याद होगा कि कोरोना वायरस के आते ही अंडों और चिकन को लेकर भी कई तरह की अफवाह फैल गई थी, जिसका असर पोल्ट्री उद्योग पर भी पड़ा था.

पिछले साल हुआ 22 करोड़ का घाटा

देश में पिछले साल फरवरी से अप्रैल के बीच पोल्ट्री इंडस्ट्री को 22 हजार 500 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ा. मार्च के महीने में, यानी जिस समय हमारे देश में कोरोना की शुरुआत हुई, हर रोज 160 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. All India Poultry Breeders Association का कहना है कि उस दौरान हर सप्ताह करीब 1100 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा.
पोल्ट्री उद्योग को इतना घाटा तब भी नहीं हुआ था, जब कोरोना के पहले 2004, 2006 या 2010 में बर्ड फ्लू आया था. आइए अब आपको दिखाएं कि इस बार देश भर में बर्ड फ्लू की तस्वीर क्या है.

किस राज्य में क्या हाल

सबसे पहले बात हिमाचल प्रदेश की, जहां करीब ढाई हजार विदेशी पक्षियों की मौत हो गई है. ये पक्षी हर साल सर्दियों के मौसम में कांगड़ा की पौंग झील की तरफ आते हैं. फिलहाल कांगड़ा के इंदौरा, फतेहपुर, जवाली और देहरा में चिकन और अंडे की बिक्री पर रोक लगा दी गई है. इसके अलावा पौंग झील में सभी तरह की गतिविधियां भी रोक दी गई हैं.

जम्मू-कश्मीर के आरएस पुरा सेक्टर में घराना वेटलैंड भी उन bar-headed goose के लिए मशहूर है, जो हर साल कांगड़ा की पौंग झील तक पहुंचते हैं. इसलिए यहां भी मुस्तैदी बरती जा रही है. इस वक्त भी विदेशी पक्षियों की करीब 150 प्रजाति यहां आ रही है. जिनकी सैंपलिंग की जा रही है.

हरियाणा में एक लाख से ज्यादा मुर्गियों की मौत

हरियाणा का पोल्ट्री हब कहे जाने वाले पंचकुला में एक लाख से अधिक मुर्गियों की मौत हो चुकी है. यहां से चिकन और अंडों की सप्लाई राज्य के बाहर भी होती है. लेकिन करीब महीने भर पहले शुरू हुई मुर्गियों की मौत के बाद कारोबार ठप है. फिलहाल पक्षियों के सैंपल जालंधर और भोपाल की लैब में भेजे गए हैं.

मध्य प्रदेश में कौवों की मौत

मध्य प्रदेश के इंदौर, खरगौन और मंदसौर में भी करीब साढ़े तीन सौ कौवों की मौत हो गई है. कौवों में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद मंदसौर में एहतियातन चिकन की दुकानों को बंद करवाया गया. इसके अलावा जिन दुकानों में स्टॉक में मुर्गियां रखी गई थीं, उन्हें भी हटा दिया गया. दुकानदारों का कहना है कि दुकानदारी पहले ही ठप थी, अब मुश्किल और बढ़ जाएगी.

राजस्थान में कौवे और मोर की भी मौत
राजस्थान के अलग-अलग जिलों में कौवों के अलावा कबूतर और मोर जैसे करीब 500 पक्षियों की मौत हो चुकी है. झालावाड़, जयपुर, कोटा, जोधपुर, बीकानेर और दौसा जिले में बर्ड फ्लू के मामलों की पुष्टि हो चुकी है. राजस्थान में कौवों के मरने का सिलसिला 25 दिसंबर को झालावाड़ से शुरू हुआ था. जयपुर के जल महल में भी रविवार को सात कौवे मृत पाए गए थे.

गुजरात के जूनागढ़ में 50 से ज्यादा पक्षियों की मौत हो चुकी है. यहां के बांटवा गांव में 2 जनवरी को बतख, टिटहरी, बगुला जैसे पक्षी अलग मृत पाए गए, जिसके बाद इन इलाकों में अलर्ट है.

केरल में 40 हजार पक्षियों की मौत

केरल में पोल्ट्री फार्म के 40 हजार पक्षियों को मारने का फैसला किया गया है. इसके पहले राज्य के अलप्पुझा और कोट्टायम में 12 हजार बत्तखों की जान चली गई. सरकार ने पुष्टि भी की थी कि इसके पीछे बर्ड फ्लू ही था, जिसके बाद दोनों जिलों में करीब एक किलोमीटर के दायरे में सभी पक्षियों को मारने का आदेश जारी हुआ. ताकि बीमारी फैल ना सके.

बर्ड फ्लू की बात होती है तो बार-बार एक सवाल उठता है, आखिर पक्षियों को मारना कितना सही है? हमने आपको बताया भी, केरल में हजारों पक्षियों को मारा जा रहा है. दरअसल, ऐसा पहले भी हुआ है.

2004 और 2005 के बीच बर्ड फ्लू वायरस को रोकने के लिए. सिर्फ एशिया में 10 करोड़ से ज्यादा मुर्गियों को मार दिया गया था. Food and Agriculture Organization के नियम कहते हैं कि बर्ड फ्लू रोकने के लिए पक्षियों को मारना कानून के हिसाब से सही है. लेकिन साल 2004 में ही वियतनाम में किसानों ने अपनी मुर्गियों को मारने से मना कर दिया था. उनका तर्क था कि ये कोई स्थायी समाधान नहीं है. जो भी हो, इस तर्क को एकदम से खारिज भी नहीं किया जा सकता. आप भी इसके बारे में सोचिएगा जरूर.

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