24 घंटे से पहले अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा कर रही है धरती ,, बदलाव सिर्फ एटॉमिक क्लॉक पर ही देखा जा सकता है.आ सकती है संचार व्यवस्था में दिक्कत

माहमारी ही नहीं बल्कि पृथ्वी पर और भी कई प्रकार के समस्याए आती हुई नजर आ रही है, अंतरिक्ष हलचल से आम जनता को ज्यादा समस्याएं नजर नहीं आती पर वैज्ञानिकों में यह बात हैरानी से भर रही है की, पृथ्वी की अपनी चक्कर पूरी करने की समय काफी बढ़ गयी है, अभी तक इसका कोई मूल कारण पता नहीं चला है,
धरती पिछले 50 सालों में किसी भी समय की तुलना में तेजी से घूम रही है. वैज्ञानिक अब इस बात परेशान है कि इसे कैसे मैनेज किया जाए. इस समय धरती सामान्य गति से तेज चल रही है. धरती 24 घंटे से पहले अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा कर रही है. धरती में ये बदलाव पिछले साल के मध्य में आया था,
अगर पर्यावरण की खबरों पर नजर डाला जाए तो धरती की हालत कुछ ख़ास नहीं है. अमेज़न जंगल का जलना, समुद्र की सबसे गहरी तह में प्लास्टिक में मिलना,व ऐसे कई तरह के पर्यावरण की स्थिति के बारे में अधिकतर लोगो का गंभीर ध्यान नहीं जाता है.
धरती कितनी तेजी से घूम रही हैं? इसका हमारे जीवन पर क्या असर होगा? धरती 24 घंटे में अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाती है. लेकिन पिछले साल जून से लेकर अब तक धरती अपनी धुरी पर ज्यादा तेजी से घूम रही है. इसकी वजह से धरती पर मौजूद सभी देशों का समय बदल जाता है. साइंटिस्ट्स को अपनी-अपनी जगहों पर मौजूद एटॉमिक क्लॉक का समय बदलना पड़ेगा. यानी इस बार साइंटिस्ट्स को निगेटिव लीप सेकेंड अपनी-अपनी घड़ियों में जोड़ना पड़ेगा. साल 1970 से अब तक कुल मिलाकर 27 लीप सेकेंड जोड़े जा चुके हैं. पिछले कई दशकों से धरती 24 घंटे के समय से ज्यादा समय लेकर अपनी धुरी पर घूम रही थी

लेकिन पिछले साल जून से 24 घंटे से कम समय में एक चक्कर लगा रही है. धरती इस समय 24 घंटे में 0.5 मिलीसेकेंड कम समय लेकर घूम रही है. यानी हमारे 24 घंटे में 0.5 मिलीसेकेंड कम हो चुके हैं पिछले 50 सालों से धरती के घूमने का एकदम सही आकंड़ा निकाला जा रहा है. 24 घंटे में 86,400 सेकेंड्स होते हैं. यानी इतने सेकेंड में हमारी धरती एक चक्कर पूरा करती है. लेकिन पिछले साल जून से 86,400 सेकेंड में 0.5 मिलीसेकेंड की कमी आ गई है. 19 जुलाई 2020 का दिन 24 घंटे से 1.4602 मिलीसेकेंड कम था. 2020 से पहले सबसे छोटा दिन 2005 में था. लेकिन पिछले 12 महीनों में ये रिकॉर्ड कुल मिलाकर 28 बार टूटा है.

समय का यह बदलाव सिर्फ एटॉमिक क्लॉक पर ही देखा जा सकता है. लेकिन इसकी वजह से कई सारी दिक्कतें आ सकती हैं. हमारी संचार व्यवस्था में काफी दिक्कत आ सकती है. क्योंकि हमारे सैटेलाइट्स और संचार यंत्र सोलर टाइम के अनुसार सेट किया जाते है. ये समय तारों, चांद और सूरज के पोजिशन के अनुसार सेट की जाती है पेरिस स्थित इंटरनेशनल अर्थ रोटेशन सर्विस (International Earth Rotation Service) के वैज्ञानिक समय के साथ सामंजस्य बनाए रखने के लिए 70 के दशक से अब तक 27 लीप सेकेंड जोड़े जा चुके हैं. पिछली बार साल 2016 में लीप सेकेंड जोड़ा गया है. लेकिन अब इस बार लीप सेकेंड हटाने का समय आ गया है.

यानी निगेटिव लीप सेकेंड जोड़ना पड़ेगा नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी के सीनियर रिसर्च साइंटिस्ट पीटर व्हिब्बर्ली ने कहा कि यह बात तो सही है कि धरती अपने तय समय से कम समय में एक चक्कर पूरा कर रही है. ऐसा पिछले 50 सालों में पहली बार हुआ है. ऐसा हो सकता है कि धरती पर रहे लोगों को समय के साथ चलने के लिए निगेटिव लीप सेकेंड जोड़ना पड़े

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.