AMAZING : कल लॉन्च होगा गाय के गोबर पर आधारित दीवारों का पेंट, खूबियां जान कर चौंक जाएंगे आप….

नई दिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग मंगलवार को एक खास पेंट लॉन्च करने जा रहा है। इस पेंट की मदद से सरकार एक साथ 3 लक्ष्य हासिल करने की कोशिश कर रही है। आयोग के मुताबिक खादी प्राकृतिक पेंट न केवल पर्यावरण के अनुकूल है साथ ही ये पूरी तरह से देश में विकसित उत्पाद है। वहीं इस प्रोडक्ट की बिक्री से सीधे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। लॉन्च सड़क परिवहन तथा राजमार्ग और सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योग मंत्री नितिन गडकरी करेंगे।

इस पहल से पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों के लिए कच्चे माल के रूप में गोबर की खपत बढ़ेगी और किसानों तथा गौशालाओं को अतिरिक्त आमदनी होगी। इससे किसानों और गौशालाओं को प्रति पशु लगभग 30,000 रुपये वार्षिक आमदनी होने का अनुमान है

क्या है नए पेंट का खासियत

पेंट कीमत में सस्ता है और इससे कोई गंध नहीं आती है।
पेंट पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है
पेंट सीसा, पारा, क्रोमियम, आर्सेनिक, कैडमियम और अन्य भारी धातुओं से पूरी तरह मुक्त है।
खादी पेंट फंगसरोधी और जीवाणुरोधी गुणों के साथ है
पेंट को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा प्रमाणित किया गया है।
पेंट दुनिया में अपनी तरह का पहला उत्पाद है जो गाय के गोबर पर आधारित है।
खादी प्राकृतिक पेंट दो रूपों में उपलब्ध है – डिस्टेंपर पेंट और प्लास्टिक इमल्शन पेंट।
ये पेंट सिर्फ 4 घंटे में सूख जाता है।
घर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है

नए खादी पेंट से क्या होगा फायदा

एक आधिकारिक बयान में सोमवार को कहा गया, ‘‘खादी प्राकृतिक पेंट का उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने के प्रधानमंत्री के विचार से जुड़ा हुआ है।’’ बयान के मुताबिक इससे प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से स्थानीय विनिर्माण और स्थायी स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वहीं इस तकनीक से पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों के लिए कच्चे माल के रूप में गोबर की खपत बढ़ेगी और किसानों तथा गौशालाओं को अतिरिक्त आमदनी होगी। इससे किसानों और गौशालाओं को प्रति पशु लगभग 30,000 रुपये वार्षिक आमदनी होने का अनुमान है।’’

क्या है भारत में गाय के गोबर का इस्तेमाल

भारत के गांवों में गाय के गोबर के इस्तेमाल से फर्श और दीवारों को लीपने का काम सदियों से जारी है। इसकी मदद से मिट्टी के घरों में तापमान को नियंत्रित रखने में भी मदद मिलती है। गांवों में इसका इस्तेमाल ईंधन के रूप में भी किया जाता है।

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