15 लाख के लिए आरक्षक ने गर्भवती प्रेमिका को छोड़ा

छतरपुर। पुलिस विभाग में पदस्थ आरक्षक की काली करतूतों का मामला सामने आया है। जहां वह एक साल तक शादी का झांसा देकर महिला का शारीरिक शोषण करता रहा। अब पीड़िता पुलिस अधिक्षक कार्यालय में न्याय की गुहार लेकर पहुंची है। लेकिन वहां उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। हालांकि एक समाजसेवी की दखलअंदाजी के बाद महिला को पुलिस एसपी से मिलाया गया और सिविल लाइन थाना में शारीरिक शोषण करने वाले आरक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

जानकारी के अनुसार, सागर शहर में रहने वाली लड़की कि छतरपुर पुलिस विभाग में पदस्थ आरक्षक से मुलाकात हुई जोकि प्रेम प्रसंग में बदल गई और फिर शादी करने का झांसा देकर आरक्षक ने लगातार लड़की के साथ शारीरिक शोषण किया गया, यहां तक कि लड़की ने आरोप लगाए हैं कि गर्भवती हो जाने पर उसका गर्भपात भी कराया गया। लेकिन इसी बीच लड़की को पता चला कि उसके साथ शादी का वादा करने वाला आरक्षक कहीं और शादी कर रहा है तो उसने उसे फोन लगाया लेकिन आरक्षक ने उसका फोन उठाना बंद कर दिया। आखिरकार लड़की छतरपुर आई और न्याय के लिए पुलिस के आला अधिकारियों के पास गई लेकिन आरोपी खुद पुलिस विभाग में होने के कारण उसे आश्वासन तो मिला पर कार्रवाई नहीं हालांकि पुलिस अधीक्षक से मिलने के बाद और समाजसेवी नेहा सिंह से मिलने के बाद सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज हो गया है

पीड़ित लड़की के अनुसार, आरक्षक को जब उसके छतरपुर आने और कार्रवाई करने की बात पता चली तो वह उसे थाने के बाहर मिला। वह उसे अपने साथ पहले तो कंट्रोल रूम के बाहर खड़ा करके बातें करता रहा उसके बाद पुलिस लाइन स्थित अपने निवास पर ले गया जहां पर धमकी देने के साथ धक्का-मुक्की की और जबरन दुष्कर्म किया और सुबह यह क्या कर भगा दिया कि तुम जो कुछ कर सको तो कर लो मैं किसी से नहीं डरता।

समाजसेवी नेहा सिंह ने बताया कि पीड़ित लड़की का मेरे पास फोन आया जिसके बाद में उसे पुलिस अधीक्षक के साथ-साथ सिविल लाइन थाने लेकर आई हालांकि शुरुआती दौर में मामला दर्ज नहीं हो रहा था पर अब मामला दर्ज हो गया है और मैं पुलिस अधीक्षक महोदय से मांग करती हूं कि इस मामले को पुलिस स्टाफ के नजरिए से ना देखते हुए एक आम मामला समझ कर देखें और बारीकी से जांच कराते हुए अगर आरक्षक दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। एक और प्रदेश भर में महिला जागरूकता अभियान चल रहा है और दूसरी ओर एक महिला को अगर न्याय के लिए यहां-वहां भटकना पड़े तो फिर पुलिस के इस महिला जागरूकता अभियान पर कई सवाल खड़े हो जाएंगे।

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